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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Monday, March 15, 2010

वो उदास लड़की

उसकी आँखें है बतूनी सी,और पलकों पे प्यास रहती है|
जाने क्यों,वो खूबसूरत लड़की,गुमसुम उदास रहती है ||


दिल के पन्नों पे कई गुज़रे हुए लम्हों की इबारत होगी |
कई बार चाहा पढू मगर,वो बिन खुली किताब रहती है ||


वक्त-ऐ-गुफ्तगू उससे,रहती है मुसलसल खामोशी सी |
होठों पे हंसी, पलकों में नमी, वो ओढ़े लिबास रहती है ||


कोई वादाफरोश झोंका, उससे कुछ कह गया है शायद |
उसको दहलीज़ पे अपनी इक आहट की तलाश रहती है ||

2 comments:

  1. कविता उदास है मगर अच्छी है ...

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  2. उदासी के साथ तो अपने मरासिम पुराने है निशांत भाई
    हम तो श्रंगार रस में भी उदासी तलाश ही लेते है

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