उसकी आँखें है बतूनी सी,और पलकों पे प्यास रहती है|
जाने क्यों,वो खूबसूरत लड़की,गुमसुम उदास रहती है ||
दिल के पन्नों पे कई गुज़रे हुए लम्हों की इबारत होगी |
कई बार चाहा पढू मगर,वो बिन खुली किताब रहती है ||
वक्त-ऐ-गुफ्तगू उससे,रहती है मुसलसल खामोशी सी |
होठों पे हंसी, पलकों में नमी, वो ओढ़े लिबास रहती है ||
कोई वादाफरोश झोंका, उससे कुछ कह गया है शायद |
उसको दहलीज़ पे अपनी इक आहट की तलाश रहती है ||
Monday, March 15, 2010
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कविता उदास है मगर अच्छी है ...
ReplyDeleteउदासी के साथ तो अपने मरासिम पुराने है निशांत भाई
ReplyDeleteहम तो श्रंगार रस में भी उदासी तलाश ही लेते है