Tuesday, March 12, 2013
Monday, March 11, 2013
सपने
चल अपने अपने सपनों के पीछे दौडें,
चल अपनी अपनी मंज़िल की तरफ भागें
लेकिन हाथों से एक दूजे का हाथ ना छूटे
इस शहर में भीड़ बहुत है
मौसम जो भी हों
चल अपनी अपनी मंज़िल की तरफ भागें
लेकिन हाथों से एक दूजे का हाथ ना छूटे
इस शहर में भीड़ बहुत है
मौसम जो भी हों
पर अपना साथ
ना छूटे
इस शहर में भीड़ बहुत है
भीड़ में खोये हुए लोग कई दफा
उम्र भर
अपने घर वापस नहीं आते
दो भटके हुए से पाँव हमेशा
रस्तों में ख़ाक उडाया करते हैं
एक जोड़ी सूनी आँखें उम्र तलक
उनकी खातिर दहलीज़ तका करती हैं......
इस शहर में भीड़ बहुत है
भीड़ में खोये हुए लोग कई दफा
उम्र भर
अपने घर वापस नहीं आते
दो भटके हुए से पाँव हमेशा
रस्तों में ख़ाक उडाया करते हैं
एक जोड़ी सूनी आँखें उम्र तलक
उनकी खातिर दहलीज़ तका करती हैं......
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