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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, March 12, 2013

आज फिर एक नज़्म के चेहरे पर
मैंने रख्खी उँगलियाँ
आज फिर कुछ एहसासात को मैंने
पन्नों पे उतारा
आज फिर तड़पते देखा
एक नज़्म को रूह की खातिर

काश...तुम यहाँ होते ....

Monday, March 11, 2013

सपने


चल अपने अपने सपनों के पीछे दौडें,
चल अपनी अपनी मंज़िल की तरफ भागें 

लेकिन हाथों से एक दूजे का हाथ ना छूटे
इस शहर में भीड़ बहुत है
मौसम जो भी हों
पर अपना साथ ना छूटे 
इस शहर में भीड़ बहुत है 

भीड़ में खोये हुए लोग कई दफा 
उम्र भर 
अपने घर वापस नहीं आते 

दो भटके हुए से पाँव हमेशा 
रस्तों में ख़ाक उडाया करते हैं 
एक जोड़ी सूनी आँखें उम्र तलक 
उनकी खातिर दहलीज़ तका करती हैं......

Saturday, March 9, 2013

दर्द देता है कितना
किसी की फुरसतों का सामान होना
कभी सीने से लगे रहना उसका
कभी यूँ अनजान होना

dard deta hai kitna
kisi ki fursaton ka saman hona
kabhi seene se lage rahna uska
kabhi yun anjaan hona