1.txt
Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Monday, March 11, 2013

सपने


चल अपने अपने सपनों के पीछे दौडें,
चल अपनी अपनी मंज़िल की तरफ भागें 

लेकिन हाथों से एक दूजे का हाथ ना छूटे
इस शहर में भीड़ बहुत है
मौसम जो भी हों
पर अपना साथ ना छूटे 
इस शहर में भीड़ बहुत है 

भीड़ में खोये हुए लोग कई दफा 
उम्र भर 
अपने घर वापस नहीं आते 

दो भटके हुए से पाँव हमेशा 
रस्तों में ख़ाक उडाया करते हैं 
एक जोड़ी सूनी आँखें उम्र तलक 
उनकी खातिर दहलीज़ तका करती हैं......

No comments:

Post a Comment