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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Saturday, October 4, 2014

कुछ मुड़े हुए पन्ने

अक्सर पढ़ते पढ़ते कोई किताब 
ज्यूँ मोड़ दिया करते हैं 
कुछ पन्नों के कोने हम 
फिर पढ़ने की ख्व़ाहिश में,
बिलकुल वैसे ही मोड़े थे हमने तुमने 
कुछ नर्म मुलायम लम्हों के कोने 
फिर जीने की चाहत में

मुड़े हुए इन लम्हों के मोड़ों पर 
कुछ इस तरह से ठहर गयी है ज़िन्दगी 
कि वक़्त भले ही मीलों दूर निकल आया है 
पर उन लम्हों के मुड़े हुए कोनों से 
मैं रत्ती भर भी आगे बढ़ा नहीं हूँ ...

तुम्हारे जाने के बाद

मनु ...तुम्हारे जाने के बाद
मेरी आँखों के आगे की दुनिया में
कुछ नहीं बदला
मनु....तुम्हारे जाने के बाद 
मेरी आँखों के पीछे की दुनिया में
उमडा इस क़दर एक समन्दर
कि फिर मुझसे मैं नहीं संभला
मनु ...तुम्हारे जाने के बाद
मेरी आँखों के आगे है मंजिल भी, रास्ता भी
मेरे पांवों में बाक़ी है मंजिल का हौसला भी
मैं दुनिया को दिखूं पहले जैसा
सो होंठों पर है मुस्कराहट का घौसला भी
मनु ...तुम्हारे जाने के बाद
मेरी आँखों के पीछे एक नमी सी रहती है
मैं रहता हूँ भीड़ में हर पल मगर
दिल में रहता एक खालीपन
और कुछ कमी सी रहती है
ये आँखों के आगे की
ये आँखों के पीछे की
दोनों दुनियाएं मेरे साथ चलती हैं
और भागता रहता हूँ मैं
इस दुनिया से उस दुनिया
जब चूर हो जाता हूँ थककर
तो ये सोचता हूँ अक्सर
किस तरह पूरी दुनिया एक शख्स में समाई होती है
क्यूँ नहीं पूरी दुनिया से एक शख्स की भरपाई होती है
इन्ही सवालात की लहरों में
मैं गोते खा रहा हूँ
कभी आँखों के आगे की
कभी आँखों के पीछे की
दुनिया में दिन बिता रहा हूँ
तुम्हारे जाने के बाद....