हमने एक शाम छुपा रख्खी है,
तेरी खुश्बू से महकी हुई,
अपनी पलकों के तहखाने में|
दुनिया के तेज़ उजालों से,
जब आँखें जलने लगती हैं,
तेरी यादों के गुलाबजल में,
दो क़तरा वो शाम मिलाकर,
इन आँखों में मल लेते हैं,
तब रूह का रेशा-रेशा,
और जिस्म का पोर-पोर,
चन्दन से,
शीतल हो जाते हैं,
हमने एक शाम छुपा रख्खी है .........
तेरी खुश्बू से महकी हुई,
अपनी पलकों के तहखाने में|
दुनिया के तेज़ उजालों से,
जब आँखें जलने लगती हैं,
तेरी यादों के गुलाबजल में,
दो क़तरा वो शाम मिलाकर,
इन आँखों में मल लेते हैं,
तब रूह का रेशा-रेशा,
और जिस्म का पोर-पोर,
चन्दन से,
शीतल हो जाते हैं,
हमने एक शाम छुपा रख्खी है .........












