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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Wednesday, June 8, 2011

हदें

एक पल में दूर निकल आया था, 
मैं तेरी बाहों के दायरों से.
तब ये इल्म ना था मुझको 


तेरी खुश्बू की, 
तेरी कसमों की


तेर होठों की जुम्बिश की
तेरी आँखों की शरारत की 


तेरे पलकों के शबनम की 
तेरी बातों की सरगम की   
सरहदें 
और तेरे चाहने की हदें 
इतनी दूर तक फैली होंगी 
कि इन्हें पार करते करते 


         मैं अपनी उम्र की हद पे आ गया हूँ 

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