एक पल में दूर निकल आया था,
मैं तेरी बाहों के दायरों से.
तब ये इल्म ना था मुझको
तेरी खुश्बू की,
तेरी कसमों की
तेर होठों की जुम्बिश की
तेरी आँखों की शरारत की
तेरे पलकों के शबनम की
तेरी बातों की सरगम की
सरहदें
और तेरे चाहने की हदें
इतनी दूर तक फैली होंगी
कि इन्हें पार करते करते
मैं अपनी उम्र की हद पे आ गया हूँ
मैं तेरी बाहों के दायरों से.
तब ये इल्म ना था मुझको
तेरी खुश्बू की,
तेरी कसमों की
तेर होठों की जुम्बिश की
तेरी आँखों की शरारत की
तेरे पलकों के शबनम की
तेरी बातों की सरगम की
सरहदें
और तेरे चाहने की हदें
इतनी दूर तक फैली होंगी
कि इन्हें पार करते करते
मैं अपनी उम्र की हद पे आ गया हूँ

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