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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Monday, June 20, 2011

एक आंसू

मेरी आँखों की उँगलियों से छूटकर
मेरे गालों पे छटपटाता हुआ
जो रेत में जा मिला है
एक आँसू
वो महज़ क़तरा भर पानी नहीं
एक रिश्ता है
जो जिया था मैंने एक उम्र भर 

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