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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Friday, June 24, 2011

यादों का गुलाबजल

हमने एक शाम छुपा रख्खी है,
तेरी खुश्बू से महकी हुई,
अपनी पलकों के तहखाने में|


             दुनिया के तेज़ उजालों से, 
             जब आँखें जलने लगती हैं,


तेरी यादों के गुलाबजल में,
दो क़तरा वो शाम मिलाकर,
इन आँखों में मल लेते हैं,


             तब रूह का रेशा-रेशा, 
             और जिस्म का पोर-पोर, 
             चन्दन से,
            शीतल हो जाते हैं, 


हमने एक शाम छुपा रख्खी है .........  

1 comment:

  1. तेरी यादों के गुलाबजल में,
    दो क़तरा वो शाम मिलाकर,
    इन आँखों में मल लेते हैं,
    बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति। दिल के छू लेने वाली।

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