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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Saturday, June 4, 2011

मोजिज़ा (चमत्कार)

तेरी आमद से ये मोजिज़ा हो गया है 
कि सजदे को मयस्सर खुदा हो गया है


महकी हुई सी रात है तेरे तस्सवुर से 
तेरी खुश्बू से दिन इक नशा हो गया है


ये तंज़ भी अब मुझको अज़ीज़ लगते हैं 
दोस्त कहते है जब तू बावरा हो गया है 


बर्फ के टुकड़े पर हो गोया धूप की चादर
मेरी बाहों में यूँ तू क़तरा क़तरा हो गया है 


कहाँ परवाह मुझको है अब ज़माने की  
अब तू  मेरे लिए जहाँ से बड़ा हो गया है 


सदियों पुराना लफ्ज़-ऐ-इज़हार-ऐ- मुहब्बत 
होठों से तेरे फिसलकर फिर नया हो गया है   


               मोजिज़ा - चमत्कार , आमद - आना , तंज़ - कटाक्ष , गोया - जैसे,
               लफ्ज़-ऐ -इज़हार-ऐ-मुहब्बत - प्यार को बयान करने वाल शब्द
               

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