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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, April 2, 2013

मुहब्बत


मैं ऐसा तो ना था
जैसा बना दिया है मुझको
तेरी चाहत के गुरूर ने
तेरी खुश्बू के सुरूर ने
तेरे दीदार की ख्वाहिशों ने
तेरी नज़रों की फरमाइशों ने
तेरे सजदों की पाकीज़गी ने
तेरे किरदार की संजीदगी ने
तेरे एतबार की मासूमियत ने
तेरे ख़्वाबों की रंगीनियत ने
तेरी नाराज़गी के दर्द-ओ-गम ने
मुझको रो रो के मनाने के तेर ढंग ने
तुझको पा लेने के मसर्रत-ओ-खुमार ने
तुझको खो देने की दहशत बेशुमार ने
सच कहते हैं लोग
मुहब्बत कमाल की शै है ...


वो रास्ते तमाम
जो तेरी दहलीज़ तक जाते थे
उन सब पर खुद ही तो तूने
बंदिशों की, अपनी कसमों की
दीवारें रख दी हैं
और मेरे सर ये गुनाह भी लिख दिया है
कि तुझ तक पहुंचने में
मैं नाकामयाब रहा .......

वो अजनबी लड़की

वो अजनबी लड़की....

चंद रोज़ पहले तक मैं जिसको जानता न था
वो अजनबी लड़की जिससे मेरा कोई वास्ता न था

रात भर मेरे काँधे पे सर रखकर
सुबक सुबक कर रोती रही
और मैं तलाशता रहा उसके अश्कों में एक अजनबी चेहरा

वो जिससे खफा थी
फिर उसी से मिलने की जल्दबाज़ी में
मेरे कमरे में भूल गयी है
अपने कुछ आंसूं.....

हौसला

मुश्किलों में हौसलों का सिलसिला रखना
अपनी पलकों पर ख़्वाबों का काफिला रखना

भले दिल में हों तेरे कितनी भी तन्हाईयाँ
बंद कमरों से मगर एक फासला रखना

पाँव भले ही ज़ख़्मी हों किस्मत के काँटों से
मुस्कराहट से मगर चेहरा धुला रखना

मचल उठ्ठे तुझे पाने की खातिर जाने कब
ज़िन्दगी की आमद को बस दर खुला रखना

हारने या जीतने से भी ज़रूरी है
ज़िन्दगी के युद्ध में खुद को खड़ा रखना