मैं ऐसा तो ना था
जैसा बना दिया है मुझको
तेरी चाहत के गुरूर ने
तेरी खुश्बू के सुरूर ने
तेरे दीदार की ख्वाहिशों ने
तेरी नज़रों की फरमाइशों ने
तेरे सजदों की पाकीज़गी ने
तेरे किरदार की संजीदगी ने
तेरे एतबार की मासूमियत ने
तेरे ख़्वाबों की रंगीनियत ने
तेरी नाराज़गी के दर्द-ओ-गम ने
मुझको रो रो के मनाने के तेर ढंग ने
तुझको पा लेने के मसर्रत-ओ-खुमार ने
तुझको खो देने की दहशत बेशुमार ने
सच कहते हैं लोग
मुहब्बत कमाल की शै है ...



