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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, April 2, 2013


वो रास्ते तमाम
जो तेरी दहलीज़ तक जाते थे
उन सब पर खुद ही तो तूने
बंदिशों की, अपनी कसमों की
दीवारें रख दी हैं
और मेरे सर ये गुनाह भी लिख दिया है
कि तुझ तक पहुंचने में
मैं नाकामयाब रहा .......

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