मुश्किलों में हौसलों का सिलसिला रखना
अपनी पलकों पर ख़्वाबों का काफिला रखना
भले दिल में हों तेरे कितनी भी तन्हाईयाँ
बंद कमरों से मगर एक फासला रखना
पाँव भले ही ज़ख़्मी हों किस्मत के काँटों से
मुस्कराहट से मगर चेहरा धुला रखना
मचल उठ्ठे तुझे पाने की खातिर जाने कब
ज़िन्दगी की आमद को बस दर खुला रखना
हारने या जीतने से भी ज़रूरी है
ज़िन्दगी के युद्ध में खुद को खड़ा रखना
अपनी पलकों पर ख़्वाबों का काफिला रखना
भले दिल में हों तेरे कितनी भी तन्हाईयाँ
बंद कमरों से मगर एक फासला रखना
पाँव भले ही ज़ख़्मी हों किस्मत के काँटों से
मुस्कराहट से मगर चेहरा धुला रखना
मचल उठ्ठे तुझे पाने की खातिर जाने कब
ज़िन्दगी की आमद को बस दर खुला रखना
हारने या जीतने से भी ज़रूरी है
ज़िन्दगी के युद्ध में खुद को खड़ा रखना

No comments:
Post a Comment