एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है परछाईं जैसा,
मैं जब भी अंधेरों में डूबकर, उसकी तरफ तकता हूँ,
वो मुझसे जुदा हो जाता है,
एक रिश्ता है खूबसुरत सा मगर है एक तरफा सा,
में अगर रूठूँ तो मेरे हाल पर छोड़कर मुझको
वो पत्थर का खुदा हो जाता है|
एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है किसी बच्चे जैसा,
देता है महज़ तारीफों की इजाज़त, ख़ामियों पे अगर कुछ बोलूं उसकी
तो मुझसे खफ़ा हो जाता है,
एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है चाहत के मलालों जैसा,
सिमटे तो सिमट जाए दो लफ़्ज़ों में, और अगर बिखरे
तो पूरा एक जहाँ हो जाता है.
मैं भी रोऊंगा बहुत इस रिश्ते को तर्क करके,
वो भी तडपेगा यकीनन,
इसका टूटना लेकिन अब लाज़मी सा है
ये उस हद पे खड़ा है जहाँ कोई रिश्ता,
लुत्फ़ से सज़ा हो जाता है
मैं जब भी अंधेरों में डूबकर, उसकी तरफ तकता हूँ,
वो मुझसे जुदा हो जाता है,
एक रिश्ता है खूबसुरत सा मगर है एक तरफा सा,
में अगर रूठूँ तो मेरे हाल पर छोड़कर मुझको
वो पत्थर का खुदा हो जाता है|
एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है किसी बच्चे जैसा,
देता है महज़ तारीफों की इजाज़त, ख़ामियों पे अगर कुछ बोलूं उसकी
तो मुझसे खफ़ा हो जाता है,
एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है चाहत के मलालों जैसा,
सिमटे तो सिमट जाए दो लफ़्ज़ों में, और अगर बिखरे
तो पूरा एक जहाँ हो जाता है.
मैं भी रोऊंगा बहुत इस रिश्ते को तर्क करके,
वो भी तडपेगा यकीनन,
इसका टूटना लेकिन अब लाज़मी सा है
ये उस हद पे खड़ा है जहाँ कोई रिश्ता,
लुत्फ़ से सज़ा हो जाता है
