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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Friday, August 12, 2011

एक रिश्ता

एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है परछाईं जैसा,
मैं जब भी अंधेरों में डूबकर, उसकी तरफ तकता हूँ,
वो मुझसे जुदा हो जाता है,

एक रिश्ता है खूबसुरत सा मगर है एक तरफा सा,
में अगर रूठूँ तो मेरे हाल पर छोड़कर मुझको
वो पत्थर का खुदा हो जाता है|

एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है किसी बच्चे जैसा,
देता है महज़ तारीफों की इजाज़त, ख़ामियों पे अगर कुछ बोलूं उसकी
तो मुझसे खफ़ा हो जाता है,

एक रिश्ता है खूबसुरत सा, मगर है चाहत के मलालों जैसा,
सिमटे तो सिमट जाए दो लफ़्ज़ों में, और अगर बिखरे
तो पूरा एक जहाँ हो जाता है.

मैं भी रोऊंगा बहुत इस रिश्ते को तर्क करके,
वो भी तडपेगा यकीनन,
इसका टूटना लेकिन अब लाज़मी सा है
ये उस हद पे खड़ा है जहाँ कोई रिश्ता,
लुत्फ़ से सज़ा हो जाता है