राजभवन में राम के हुआ अचानक हल्ला
सावधान ए वीरो हो सकता है राम पे हमला
क्रोध में भरकर बोले लक्ष्मण जो भ्राता पर कुद्रष्टि डालेगा
है शपथ राम की ये दास राम का,उसका नाम मिटा डालेगा
मंद मंद मुस्काकर बोले भगवन अनुज शांत हो जाओ तुम
गौर से सारे खेल को समझो और सबको समझाओ तुम
हाथों में जो फूल लिए है मुझको अर्पित करने आया है
और उसके रस्ते में जिसने साइकिल का जाल बिछाया है
अपने अपने खेल के देखो, दोनों मंझे खिलाड़ी हैं
दोनों एक दूजे के पूरक हैं, दोनों पक्के वाले याड़ी हैं
हाथ ये हर पल सोच रहा है कैसे फिर खेल का हिस्सा हो जाऊं मैं
हाथी भी है घात लगाये, किसको कुचलूँ किसको सर पे बिठाऊं मैं
निश्चिन्त रहो हे लक्ष्मण बिलकुल नहीं तुम्हारा राम खतरे में
वो भी खुदा को बेच रहे हैं, जो चीख रहे कि है इस्लाम खतरे में
बस उलझा दिया है आम आदमी , विकास का ताकी ज़िक्र न हो
पड़ जाएगी वर्ना इन सबकी आपनी अपनी दुकान खतरे में
लक्ष्मण क्या मुझे सुरक्षा देगा कोई,क्या मुझे हानी पहुंचाएगा
जिस दिन हल्का सा भी चाह लूँगा सब मिटटी में मिल जायेगा










