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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Friday, August 23, 2013

शिकवा

मैं तेरी ही सूरत तलाशता हूँ 
खंडहर से भी मंदिर में
मैं सज्दा करके ही बढ़ता हूँ आगे 

बंद मस्जिद को भी तेरी
तू गुज़र पाता है कैसे 

ए खुदा
मेरे ज़िंदा ख़्वाबों की आँखें मीचकर

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