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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, August 18, 2013

happy b.day gulzaar saab


तब और भी चमकीले लगते हैं, आपकी मुठ्ठी के चाँद सूरज
कुछ और भी बुलंद दिखती हैं आपके क़दमों तलें की बुलंदियां
जब बीत गयी हों सदियाँ कई, महज़ एक चिराग जलाने में
जब खर्च हो गयी हो साबुत उम्र, नाकुछ सा मकाम पाने में

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