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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Wednesday, August 21, 2013

मलाल

जिस तरह किसी ने रेत पे हर्फ़ लिखकर मिटाया हो
उस तरह जिस शख्श ने मुझे चाहा और भुलाया हो

वो अब भी इस तरह से क्यूँ है शामिल मुझमें
कि हर किसी को मुझमें वो नज़र आता है अब भी
मैं किसी देश, किसी शहर ,किसी राह चला जाऊं
वो मेरी बाजू से गुज़र जाता है अब अभी
अक्स नज़र आता है उसी का मेरे अंदाज़-ओ-तास्सुरात में
ज़िक्र आता है उसका खुद-ब-खुद मेरी कही हर बात में

जाने क्यूँ उसको रस्म-ए-मुहब्बत निभाना नहीं आया
जाने क्यूँ मुझे उसको याद करके भुलाना नहीं आया

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