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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Friday, June 10, 2011

मेरी बिट्टो

मेरी बिट्टो
चंचल सी तुम्हारी आँखों में,
जब नन्हें ख़्वाब कुलाँचे भरते हैं,
पलकों में उलझकर ख़्वाब कई,
जब संग तुम्हारे सोते जगते हैं,
           
                        जब तुतला तुतला कर,
                        तुम मुझसे बातें करती हो,  
                        जब नन्हें होठों को तुम,
                        मेरे गालों पर रखती हो,


उस पल  
अपने सारे गम,सारे ज़ख्मों को, 
मैं पल में भुला देता हूँ,
मेरी आँखों के वो ख़्वाब कई,
जिनकी साँसे उखड रही हैं,
फिर से ज़िंदा हो जाते हैं.


                     फिर से ख्वाहिश, जीवन जीने की 
                     इस दिल में जवां हो जाती है.   

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