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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Wednesday, June 1, 2011

प्रतिबिम्ब


मैं तुम्हारे कदमों के निशानों पर, 
अपने कदमों को जो रखकर चलता हूँ,
दरअसल,
मैं वो उम्र जी रहा हूँ
इस बहाने से,
जो मैं तब जी आया था 
जब मुझे इल्म ही न था,
बचपन की अहमियत का, 

                  तुमको लगता है, 
                  तुमको जीना सिखा रहा हूँ मैं
                  सच तो ये है तुममें,  
                  खुद को दोहरा रहा हूँ मैं   

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