मैं तुम्हारे कदमों के निशानों पर,
अपने कदमों को जो रखकर चलता हूँ,
दरअसल,
मैं वो उम्र जी रहा हूँ
इस बहाने से,
जो मैं तब जी आया था
जब मुझे इल्म ही न था,
बचपन की अहमियत का,
तुमको लगता है,
तुमको जीना सिखा रहा हूँ मैं
सच तो ये है तुममें,
खुद को दोहरा रहा हूँ मैं
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