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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, June 12, 2011

वो अजनबी चेहरे



वो अजनबी चेहरे 
तमाम
मैं वाकिफ नहीं था 
जिनके नामों से भी
कहाँ से आते थे, वो क्या करते थे.
ये भी मालूम नहीं था मुझको
बस यूँ ही रोज़ दिखा करते थे
                
 वो अजनबी चेहरे....

कभी चाय की ठेली पर,
कभी ट्रेन में,
कभी सड़क पर आते जाते. 
बरसों बीत है दिल्ली छोड़े
पर अब भी वो  याद आते हैं,
ना जाने कहां होंगे, ना जाने कैसे होंगे,
ना मालूम कि होंगे भी कि नहीं होंगे,

वो अजनबी चेहरे ............ 

वो लोग 
जो अनजाने ही बन जाते हैं 
हमसफ़र हमारे
गाहे-बगाहे 
हमारी यादों को महकाते हैं 
कभी कभी जीवन के सफर में  
किसी अपने की तरह याद आते हैं 

वो अजनबी चेहरे .......  

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