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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Thursday, June 2, 2011

कोशिश

कोशिश तो बस, 
कोशिश ही होती है
जाने कब नाकाफी पड़ जाये


              कोशिश, तुम्हे भुला देने की
              एक अरसे से शर्मिंदा है मुझसे,


दिन भर इस ग़फलत में रहकर 
कि भूल गया हूँ तुमको 
घर वापस आता हूँ जब 
और घर के कोने-कोने में 
तुम बिखरे मिलते हो 


              जुदा हुए यूँ तुमसे बरसों बीत गए है
              घर के आईने में लेकिन तुम छूट गए हो
              हर वो चीज़, कभी जो तुमसे वाबस्ता थी 
              चेहरा धर लेती है तुम्हारा 


तब मैं रात रात भर जाग जाग कर 
तुम्हे समेटा करता हूँ 
और ये बात ज़हन में आती है 


                 कोशिश तो बस कोशिश ही होती है 
                 जाने कब नाकाफी पड़ जाये............
           

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