कोशिश तो बस,
कोशिश ही होती है
जाने कब नाकाफी पड़ जाये
कोशिश, तुम्हे भुला देने की
एक अरसे से शर्मिंदा है मुझसे,
दिन भर इस ग़फलत में रहकर
कि भूल गया हूँ तुमको
घर वापस आता हूँ जब
और घर के कोने-कोने में
तुम बिखरे मिलते हो
जुदा हुए यूँ तुमसे बरसों बीत गए है
घर के आईने में लेकिन तुम छूट गए हो
हर वो चीज़, कभी जो तुमसे वाबस्ता थी
चेहरा धर लेती है तुम्हारा
तब मैं रात रात भर जाग जाग कर
तुम्हे समेटा करता हूँ
और ये बात ज़हन में आती है
कोशिश तो बस कोशिश ही होती है
जाने कब नाकाफी पड़ जाये............
कोशिश ही होती है
जाने कब नाकाफी पड़ जाये
कोशिश, तुम्हे भुला देने की
एक अरसे से शर्मिंदा है मुझसे,
दिन भर इस ग़फलत में रहकर
कि भूल गया हूँ तुमको
घर वापस आता हूँ जब
और घर के कोने-कोने में
तुम बिखरे मिलते हो
जुदा हुए यूँ तुमसे बरसों बीत गए है
घर के आईने में लेकिन तुम छूट गए हो
हर वो चीज़, कभी जो तुमसे वाबस्ता थी
चेहरा धर लेती है तुम्हारा
तब मैं रात रात भर जाग जाग कर
तुम्हे समेटा करता हूँ
और ये बात ज़हन में आती है
कोशिश तो बस कोशिश ही होती है
जाने कब नाकाफी पड़ जाये............

behad marmik rachana
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