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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Friday, June 3, 2011

ज़िन्दगी तू दोस्त नहीं हो सकती

ज़िन्दगी तू बेवफा है ,
तू किसी की दोस्त नहीं हो सकती
तू हिटलर है ,तू तुग़लक है,
तू तानाशाह है बस
ज़िन्दगी तू दोस्त नहीं हो सकती

                  सूरज से मरासिम थे जिनके
                  जिनकी हमसफ़र थी चाँदनी
                  उनकी आँखें भी अब
                  क़तरा भर रौशनी की मुंतज़िर है

जिनके घर में तलाशा करती थी
ज़िन्दगी घरौंदे अपने
आज वो कहने को महज़ ज़िंदा भर हैं

                 शोहरत के मीनारों पर जिनके परचम लहराते थे
                 जिन्हें देखकर लाखों दिल धक से धड़क जाते थे

उन राजकिरण को आज ज़िन्दगी
पागलखाने ले आई है
उनके होठों पर है ख़ामोशी
आँखों में बस तन्हाई है

ज़िन्दगी तू दोस्त नहीं हो सकती
             तू हिटलर है , तू तुग़लक है,
                                     तू तानाशाह है बस

3 comments:

  1. सुंदर शब्द योजब=ना और विचारोत्तेजक भाव से लिखी गई नज़म अपना संदेश छोड़ती है।

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  2. Wow Great Lines

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  3. शुक्रिया मनोज जी दिनेश जी, आपकी हौसलाफजाई मुझे हिम्मत देती है

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