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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, June 19, 2011

बाबू जी

बाबू जी 
दुनिया की हर ऊँचाई 
उस ऊँचाई के आगे बोनी लगती हैं
जो हवा में उछालकर मुझको
आपने बख्शी थी पहली मर्तबा


साफ झलकती हैं 
मेरे नज़रिए में नज़रें आपकी 
लकीर बनके उभर आये हैं
मेरी हथेली पर 
आपकी उस ऊँगली के निशाँ
जिस ऊँगली को पकड़कर 
मैं पहली दफा खड़ा हुआ था 


नज़रों में जला करती हैं चराग़ बनकर 
अंधेरों में दुआ आपकी 
याद आती हैं बहुत मुझको 
आपसे बिछडकर झिड़कियाँ आपकी 


मेरी किस्मत में लिख दिया है 
ये परदेस किस्मत ने 
और इस परदेस में
आप बहुत याद आते हैं 
       "बाबू जी"
  

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