बाबू जी
दुनिया की हर ऊँचाई
उस ऊँचाई के आगे बोनी लगती हैं
जो हवा में उछालकर मुझको
आपने बख्शी थी पहली मर्तबा
साफ झलकती हैं
मेरे नज़रिए में नज़रें आपकी
लकीर बनके उभर आये हैं
मेरी हथेली पर
आपकी उस ऊँगली के निशाँ
जिस ऊँगली को पकड़कर
मैं पहली दफा खड़ा हुआ था
नज़रों में जला करती हैं चराग़ बनकर
अंधेरों में दुआ आपकी
याद आती हैं बहुत मुझको
आपसे बिछडकर झिड़कियाँ आपकी
मेरी किस्मत में लिख दिया है
ये परदेस किस्मत ने
और इस परदेस में
आप बहुत याद आते हैं
"बाबू जी"
दुनिया की हर ऊँचाई
उस ऊँचाई के आगे बोनी लगती हैं
जो हवा में उछालकर मुझको
आपने बख्शी थी पहली मर्तबा
साफ झलकती हैं
मेरे नज़रिए में नज़रें आपकी
लकीर बनके उभर आये हैं
मेरी हथेली पर
आपकी उस ऊँगली के निशाँ
जिस ऊँगली को पकड़कर
मैं पहली दफा खड़ा हुआ था
नज़रों में जला करती हैं चराग़ बनकर
अंधेरों में दुआ आपकी
याद आती हैं बहुत मुझको
आपसे बिछडकर झिड़कियाँ आपकी
मेरी किस्मत में लिख दिया है
ये परदेस किस्मत ने
और इस परदेस में
आप बहुत याद आते हैं
"बाबू जी"

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