इसको मेरे जैसा या फिर मुझको ऐसा कर दे|
दुनिया और मुझको लेकिन इक जैसा करदे||
सच कहने के एवज़ में दुनिया शूल चुभोये ना|
या मेरे दिल के भीतर तु कालिख जैसा भर दे||
सब ज़ख्मों का सबब है, दिल का आईनापन|
एहसास छीनकर दिल को पत्थर जैसा कर दे
Monday, March 15, 2010
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