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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Wednesday, March 10, 2010

मुठ्ठी भर चांदनी

घनी  रातों  के  ये  साये
मेरे  घर  में  चले   आये


जिस्म में सांस घुटती है
रूह  फ़रियाद  करती  है


मेरी  दहलीज़ से रिश्ता
कोई सूरज नहीं  रखता


मेरी  छत की मुंडेरों को
कोई  चंदा  नहीं तकता


सितारे, चाँद, सूरज, तु
 लुटा महलों पे या रब्बा


 मेरी मायूस खिडकी पर
 कभी चुपके से बस रखजा.


     मुठ्ठी भर चांदनी.....  

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