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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, March 7, 2010

कतरा भर जिंदगी


रवायतें तमाम,
जिंदा होने की,
एक मुद्दत से बड़ी शिद्दत से, 
में निभा रहा हूँ खुदा, 
जगना ,सोना, चलना, फिरना,
दिलसे या बेदिल से, 
तेरे सिजदे में  झुकना,
जब तू चाहे रोना
जब तू चाहे हंसना,
जिंदा रहने का नाटक करते-करते 
मैंने भी एक उम्मीद लगाली है, 
वक्त मिले तो मुझे भी देना, 
जीने को कभी, 
कतरा दो कतरा जिंदगी 

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