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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, March 23, 2010

ख़ुदा


दिल कुछ डरा डरा सा रहता है,
एक दहशत अनजानी सी,
ज़हन पे हावी रहती है,

तेरे वजूद को नकारा तो नहीं मैंने,
बस सिज्दे करना छोड़ दिया है,

तु सिज्दों का आदी है,
ताक़तवर भी,
और खुदा है,
जाने क्या कर बैठे


                         मेरे संग....

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