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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, March 9, 2010

काश तू मेरा हो जाये




मेरी उदास आँखों में चंद सपनो का बसेरा हो जाये,
काश.... तू मेरा हो जाये
तेरी पलकों में सूरज खिले
मेरी रातों का सवेरा हो जाये
काश..... तू मेरा हो जाये......
               किसी और के हाथों की तू लकीर सही
               इस दिल के हाथों मगर मजबूर हूँ में
               उम्र भर न सही चंद लम्हों को सही
मेरी लकीरों में तेरा डेरा हो जाये
काश.... तू मेरा हो जाये .....


               ये कतरा कतरा जीना ये बोझिल साँसों की तिजारत
               जाने कब तक यूँ ही ढोनी हो
               में तेरी बाँहों के दायरों में सिमटु जब 
खत्म जिंदगी का फेरा हो जाये 
काश... तू मेरा हो जाये ..........

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