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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, March 21, 2010

ख़्वाब


मुझे आगोश में भर कर आहिस्ता से,

मेरी पेशानी पर,

अपने नर्म-ओ-नाज़ुक लबों से

एक खूबसूरत,

मुलायम सा बोसा रख दे,

मेरी पलकों पे, जो उदास बैठा रहता है,

ऐ ज़िन्दगी, वो ख़्वाब मुक़म्मल करदे

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