तुम्हारे बदन की गोलाई
वो मेरा उँगलियों से नापना
तुम्हारी आमद से हो जाना
वो मेरे घर का खुशबू खुशबू
तुम्हे यूँ ही ताकते रहना वो मेरा अपलक
मेरे होठों पे हावी वो तुम्हे पा लेने की ललक
जिस्म से होते हुए वो तुम्हारा रूह तक जाना
सुबह शाम, हमारा इसी किस्से को दोहराना
तुम्हे देखते ही वो मेरी आँखों में समन्दर
तुम्हारे होने की ख़ुशी से वजूद मेरा तर-ब-तर
अब वो गुज़रे जन्मों की बात लगती है
बिछड़े हुए सपनो की बात लगती है
कभी वक़्त मिले तो घर लौट का आना
मैं तुमसे बिछड़कर उदास बहुत हूँ
ए मेरी दोस्त प्याज

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