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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, September 24, 2013

हौसला


खुद पे इतरा न यूँ, ज़िन्दगी
मेरे होठों पे देखकर
मुस्कुराहट के काफिले
तेरी सलाहियतों का नहीं
ये मेरे हौसले का जलवा है
कि मुस्कुरा रहा हूँ मुसलसल
मैं तेरे ग़म को दरकिनार करके

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