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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, September 3, 2013

खामोशियाँ

न उसने कुछ कहा न मैंने ही कुछ कहा
बस तैरती रही एक खामोशी दरमियाँ
न मालूम कि कर पायी तर्जुमा
किस हद तक वो मेरी खामोशी का
ना मालूम समझ पाया कितना
मैं उसकी खामोशी के मानी
बस इतना ही समझ पाए दोनों
कि ये वक़्त-ए-जुदाई है
मुस्कुराके गले मिले
हम एक दुसरे से
और उम्र भर को जुदा हो गए

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