मेरे अनुत्तरित प्रश्नों से रंगा मेरा मन दर्पण
तुम्हारा दीर्घ मौन, मौन की तीखी चुभन
और हमारा रिश्ता
सपनों के अम्बर पर मेरा मन हिरन
बंदिशों, दायरों का घर तुम्हारा जीवन
और हमारा रिश्ता
मेरे मन में कुलांचे भरते आवारगी,फ़कीरपन
बांहों में समेटने को दुनिया,आतुर तुम्हारा मन
और हमारा रिश्ता
अभावों के मंच पर, मेरी संतुष्टि के गीत की सरगम
“और कुछ” की चाह में तुम्हारे दामन का ये खालीपन
और हमारा रिश्ता
तुम्हे पाने के एवज़ में मेरा इश्वर को नमन वंदन
मुस्कुराहटें दरकिनार करके हर पल तुम्हारा क्रन्दन
और हमारा रिश्ता
प्रेम के पथ पर अपना सर्वस्व लुटाता एक जीवन
खोने पाने के गणित में उलझा एक व्यापारीपन
और हमारा रिश्ता
संग चलने की ख्वाहिशें, ना मिल पाने का बंधन
दो किनारों से फासले मगर दरिया सा सांझापन
और हमारा रिश्ता

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