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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, September 1, 2013


मेरे अनुत्तरित प्रश्नों से रंगा मेरा मन दर्पण
तुम्हारा दीर्घ मौन, मौन की तीखी चुभन
और हमारा रिश्ता

सपनों के अम्बर पर मेरा मन हिरन
बंदिशों, दायरों का घर तुम्हारा जीवन
और हमारा रिश्ता

मेरे मन में कुलांचे भरते आवारगी,फ़कीरपन
बांहों में समेटने को दुनिया,आतुर तुम्हारा मन
और हमारा रिश्ता

अभावों के मंच पर, मेरी संतुष्टि के गीत की सरगम
“और कुछ” की चाह में तुम्हारे दामन का ये खालीपन
और हमारा रिश्ता

तुम्हे पाने के एवज़ में मेरा इश्वर को नमन वंदन
मुस्कुराहटें दरकिनार करके हर पल तुम्हारा क्रन्दन
और हमारा रिश्ता

प्रेम के पथ पर अपना सर्वस्व लुटाता एक जीवन
खोने पाने के गणित में उलझा एक व्यापारीपन
और हमारा रिश्ता

संग चलने की ख्वाहिशें, ना मिल पाने का बंधन
दो किनारों से फासले मगर दरिया सा सांझापन
और हमारा रिश्ता

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