1.txt
Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Tuesday, June 29, 2010

कट्टी

उम्र के साथ बड़े हो जाते है क़द ,
क्यों शिकवे और गिलों के भी ,
कट्टी तो बचपन में भी होती थी ,
पर लम्हे दो लम्हे को बस ,
क्यों होती है पर ,
इतनी लंबी कट्टी अब ,
कि उम्रें छोटी पड़ जाती हैं ,
कट्टी से बुच्ची के सफर में .

No comments:

Post a Comment