उम्र के साथ बड़े हो जाते है क़द ,
क्यों शिकवे और गिलों के भी ,
कट्टी तो बचपन में भी होती थी ,
पर लम्हे दो लम्हे को बस ,
क्यों होती है पर ,
इतनी लंबी कट्टी अब ,
कि उम्रें छोटी पड़ जाती हैं ,
कट्टी से बुच्ची के सफर में .
Tuesday, June 29, 2010
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