मुझे उम्मीद थी ,वो समझेगी खामोशियाँ मेरी,
दुनिया को मगर हाय,
ये हुनर आता ही कहाँ है,
जिनको था तिजारत का शउर,
वो पत्थर भी हीरे साबित हो गए,
वर्ना उम्र भर वो हीरे कई,
गर्द की ज़द में थे,
जो हर एक महफ़िल में पहुंचा ना सके
अपने हीरा होने की खबर ......
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