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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, June 20, 2010

खामोशियाँ

मुझे उम्मीद थी ,
वो समझेगी खामोशियाँ मेरी,
दुनिया को मगर हाय,
ये हुनर आता ही कहाँ है,
जिनको था तिजारत का शउर,
वो पत्थर भी हीरे साबित हो गए,
वर्ना उम्र भर वो हीरे कई,
गर्द की ज़द में थे,
जो हर एक महफ़िल में पहुंचा ना सके
अपने हीरा होने की खबर ...... 

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