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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Saturday, July 3, 2010

वो खिड़की उदास रहती है

वो खिड़की,
जो मेरी खिड़की से दिखती है ,
जिसमे अक्सर तुम दिखते थे ,

अब वो खिड़की उदास रहती है,

ना जाने कब सोती है,
ना जाने कब जगती है,

एक अरसे के बाद यूं ही ,
उस खिड़की पर नज़र पड़ी ,
तो याद आया मुझे,
कभी मामूल में था शामिल ,
सुबह उठना वो खिड़की तकना ,
जब भी अपनी खिड़की पर आना ,
उस खिड़की से आँख मिलाना ,
करती रहती थीं बातें ,
दोनों खिड़की जाने क्या क्या ,

जब से निकल गए हो तुम ,
उस खिड़की की बांहों से ,
वो ख़ामोशी का ओढ़े लिबास रहती है ,

अब वो खिड़की उदास रहती है .

5 comments:

  1. क्या बात है ...बहुत सही बंधू |

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे ०४.0७.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति...!!

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  4. आप सभी का आभार

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  5. बहुत खूब !!!!!

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