Saturday, July 10, 2010
पप्पी
पप्पी..
मैं इस मुग़ालते में था
कि मैं भूल गया हूँ तुमको,
और शहर बदलकर मैंने
रिश्तों का चेहरा भी बदल लिया है,
अब वो रिश्ता नहीं बाक़ी
मेरे तुम्हारे दरमियाँ,
जिसका एक नाम था कभी,
तुम मुझको दादा कहते थे
और में तुम्हे प्यार से "पप्पी"
फिर तुमने शराब से मिरासिमदारी करली,
और बाक़ी सारे रिश्ते एक बोतल से हार गए,
तबसे अबतक मैंने तुमसे नफरत की है,
पर आज अचानक खबर ये सुनकर,
कि तुम दुनिया से चले गए हो,
परदेस में बैठा रोता हूँ मैं
अपने कमरे का कैदी होकर,
तुम तो जा ही चुके हो,
काश तुम्हारे जिस्म को छूकर
तुम से मिल पाता आखरी मर्तबा,
पर वक्त की अपनी मजबूरी है,
जीने की शर्तें ज़रूरी हैं,
अब जबकि आखरी सफर पे
तुम्हे निकाल रहे होंगे लोग,
वक्त-ऐ-रुख़सत दुनिया से
तुम मुझमे से भी निकल रहे हो,
ये आंसू बन कर,
मुझको इल्म नहीं था पप्पी,
तुम मुझमे इतने बाक़ी हो,
मुझको इल्म नहीं है पप्पी,
तुम मुझमे कितने बाक़ी रह जाओगे.
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भावभीनी बिदाई !!! very touching!!!!
ReplyDeleteAchchhi Rachana hai... shayad kuchh personal si...
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