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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Wednesday, February 23, 2011

दरमियाँ.. कुछ है

ना तुमने ही कहा था दुनिया से कुछ,
ना मैंने ही बताया था कुछ भी
उन दिनों
जिन दिनों नज़रें हमारी,
एक दूसरे के दीद से महकने लगी थीं.
पलकों से करने लगे थे अठखेलियाँ
कुछ ख़्वाब मीठे से.
और हम होने लगे थे एक दूसरे के
रफ्ता-रफ्ता.

           मगर ना जाने कैसे तब भी
           दुनिया सब कुछ  जान गयी थी
                        कि हमारे दरमियाँ कुछ है........

क़सम खुदा की अब भी
जब रिश्तों में बल पड़ गए हैं,
मैंने ज़बां पे ताले रख्खे हैं,
हर महफ़िल में खुद से पहले
नाम लिया है तुम्हारा,
तुमने भी इज्ज़त रख्खी है
इस टूटे रिश्ते की,
हर वो नाटक रोज़ किया है
जो एक अच्छे रिश्ते की निशानी है,

         मगर ना जाने कैसे अब भी
         दुनिया सब कुछ जान गयी है
                        कि हमारे दरमियाँ कुछ है ........

2 comments:

  1. bhaut hi ummnda rachana hai

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  2. lekhak ki lekhni ki tarif karun ya us rishete ki jiske darmiyan na jane kaise ye duniya simat gayi. awesome !

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