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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Thursday, May 12, 2011

अजनबी सी ज़िन्दगी

ज़िन्दगी 
रूठी हुई कोई प्रेमिका सी होती तू 
तो मना भी लेता तुझको
रूठी हुई प्रेमिका अपनी सी तो लगती है 
मुझे मालूम तो रहता है 
क्या कहके हंसा दूंगा उसको 
क्या कहके मना लूँगा उसको 
तू जो रूठे 
तो तेरे छोर पकडना मुश्किल हो जाता है
तू जो रूठे 
तो तेरे उलझे हुए से धागों को 
फिर से बुनना मुश्किल हो जाता है 
तू जो रूठे तो बखुदा 
बड़ी अजनबी सी लगती है  

2 comments:

  1. bhai lamhe ke lamhon ka jikra kaaphi achha....

    aur ek baat....agar koi copy kar ke dale bhi kahin to usmen -srijak kaa naam jarur daale.

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