ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं,
जो मेरे हालात-ऐ-मुश्किलात से नज़र आती है मुझे,
कहीं तो चहकती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
मुझ से मिलते ही जैसे
चहक जाती थीं तुम्हारी आँखें,
किसी चेहरे को ढका करती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही
कभी अपनी ज़ुल्फों से जिस तरह,
तुम मेरे चेहरे पे झुका करती थीं.
ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं .....
किसी आँगन में महकती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
तुम्हारी आमद की खबर जैसे,
मुझको खुशबू-खुशबू कर देती थी.
किसी आँगन में सोती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
चाँदनी के बिस्तर पे जिस तरह,
मेरी बाजू को सिरहाना करके
तुम सो जाती थीं.
ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं.......
जो मेरे हालात-ऐ-मुश्किलात से नज़र आती है मुझे,
कहीं तो चहकती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
मुझ से मिलते ही जैसे
चहक जाती थीं तुम्हारी आँखें,
किसी चेहरे को ढका करती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही
कभी अपनी ज़ुल्फों से जिस तरह,
तुम मेरे चेहरे पे झुका करती थीं.
ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं .....
किसी आँगन में महकती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
तुम्हारी आमद की खबर जैसे,
मुझको खुशबू-खुशबू कर देती थी.
किसी आँगन में सोती होगी
ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
चाँदनी के बिस्तर पे जिस तरह,
मेरी बाजू को सिरहाना करके
तुम सो जाती थीं.
ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं.......

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