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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Saturday, February 12, 2011

ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं

ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं,
जो मेरे हालात-ऐ-मुश्किलात से नज़र आती है मुझे,


               कहीं तो चहकती होगी 
                        ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
               मुझ से मिलते ही जैसे
                       चहक जाती थीं तुम्हारी आँखें,
            
              किसी चेहरे को ढका करती होगी 
                        ज़िन्दगी अब भी यूँ ही
              कभी अपनी ज़ुल्फों से जिस तरह,
                       तुम मेरे चेहरे पे झुका करती थीं.


ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं .....


               किसी आँगन में महकती होगी
                       ज़िन्दगी अब भी यूँ ही, 
               तुम्हारी आमद की खबर जैसे, 
                      मुझको खुशबू-खुशबू कर देती थी. 


               किसी आँगन में सोती होगी 
                      ज़िन्दगी अब भी यूँ ही,
               चाँदनी के बिस्तर पे जिस तरह,
                      मेरी बाजू को सिरहाना करके 
                            तुम सो जाती थीं.


  ज़िन्दगी सिर्फ़ यही तो नहीं....... 

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