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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, October 3, 2010

गुज़रे ग़म

दिल के ज़ख्मों को निचोड़ा बहुत
गुज़रे ग़म खंगाला कई मर्तबा मैंने

    ना तो किसी ग़ज़ल का मजमून ही निकला
    ना पलकों पे शबनम ही दिखाई दी

दिल के ज़ख्म भी
समंदर किनारे के गढ्ढों से होते है

     वक्त की आती जाती लहरों से मिलकर   
     भरे भरे से दिखने लगते है

2 comments:

  1. दिल के ज़ख्म भी
    समंदर किनारे के गढ्ढों से होते है,,,,,
    क्या बात है दोस्त ..

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