दिल के ज़ख्मों को निचोड़ा बहुतगुज़रे ग़म खंगाला कई मर्तबा मैंने
ना तो किसी ग़ज़ल का मजमून ही निकला
ना पलकों पे शबनम ही दिखाई दी
दिल के ज़ख्म भी
समंदर किनारे के गढ्ढों से होते है
वक्त की आती जाती लहरों से मिलकर
भरे भरे से दिखने लगते है
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kuch yaad dila diya..........
ReplyDeleteदिल के ज़ख्म भी
ReplyDeleteसमंदर किनारे के गढ्ढों से होते है,,,,,
क्या बात है दोस्त ..