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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Sunday, October 3, 2010

शुक्रिया ..तुमने कभी नकारा था मुझे

कई बार सोचा है कि छोड़ दूं कोशिश ,
कई बार ये ख़याल आया
कि अब हार गया हूँ शायद,
मगर वो एक लम्हा,
जिसमे तुम नकार गए थे मुझे,
ना ठहरने देता है ना बिखरने देता है,
जहां सपनों कि दीवानगी,
ना अपनों कि दुआ ही काम आई,
ज़िन्दगी से लड़ने में,
क्या बना दिया है, तुम्हारी नफरत ने
मुझको देखो ज़रा,
उठता हूँ , गिरता हूँ,
फिर लड़ता हूँ , फिर गिरता हूँ ,
ये शिददत ना बख्शी थी मुझे,
तुम्हारे प्यार ने भी,

   शुक्रिया.....
                   तुमने कभी नकारा था मुझे....

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