कई बार सोचा है कि छोड़ दूं कोशिश ,कई बार ये ख़याल आया
कि अब हार गया हूँ शायद,
मगर वो एक लम्हा,
जिसमे तुम नकार गए थे मुझे,
ना ठहरने देता है ना बिखरने देता है,
जहां सपनों कि दीवानगी,
ना अपनों कि दुआ ही काम आई,
ज़िन्दगी से लड़ने में,
क्या बना दिया है, तुम्हारी नफरत ने
मुझको देखो ज़रा,
उठता हूँ , गिरता हूँ,
फिर लड़ता हूँ , फिर गिरता हूँ ,
ये शिददत ना बख्शी थी मुझे,
तुम्हारे प्यार ने भी,
शुक्रिया.....
तुमने कभी नकारा था मुझे....
bahut achi hai............magar bahut dard bhi hai isme.
ReplyDeletewonderful thought in simple words... so smooth.
ReplyDeletethanks
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