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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Wednesday, February 24, 2010

यादें


कदमों के वो तमाम निशान,
जो लिख्खे थे हमने तुमने,
दिल्ली की सड़कों पर,
सुना है वक्त ने लगा के झाड़ू,
वो कूड़ेदान में फ़ेंक दिए है ,
उन रस्तों पर कुछ नए कदम,
लिखते है अब अपने सफर, 
बिलकुल वैसे ही,
जैसे हम तुम लिखते थे,
इक दूजे का हाथ पकड़कर
वो रहगुज़र, वो दरख़्त,वो हवाएं,
सब भूल गए है हमको,
पर तुम को तो याद है न विन्नी,
वो राह
जहाँ हम पहली बार मिले थे,
वो दरख़्त
जो हमारी कसमों का गवाह था 
वो हवाएं
जिनके पंखों पर हमने उड़ना सीखा था 

तुम्हे याद है न विन्नी.......


1 comment:

  1. मुझे याद है रवि और हमेशा वो वक्त याद रहेगा जो मैंने और तुमने साथ-साथ गुज़ारा|
    बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में तुमने यादों को को शब्दों में पिरोया है

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