मैं अक्सर
ये सोचा करता हूँ ,
जाने अब
मैं कैसा दिखता हूँ,
काश कि हासिल होते मुझको,
अब भी मरासिम तुझसे ,
भरे शहर में नहीं कोई ,
तेरी आँखों के आइनों जैसा,
।
Tuesday, February 23, 2010
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