ख्वाबो को पंखो पर रख कर,आई है ये सुबह घर,
आओ चलो इस दिन को जी लेँ
घर से निकलेँ
कच्चे पक्के ख्वाब उठाए
आओ चलो इस दिन को जी लेँ
कभी उजले हैँ, कभी काले हैँ
जीवन के रंग निराले हैँ
अम्बर के इस कैनवास पर
पलकोँ के रंग उडेलेँ
आओ चलो इस दिन को जी लेँ

No comments:
Post a Comment