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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Saturday, February 27, 2010

सहर

ख्वाबो को पंखो पर रख कर,आई है ये सुबह घर,
आओ चलो इस दिन को जी लेँ
घर से निकलेँ
कच्चे पक्के ख्वाब उठाए
आओ चलो इस दिन को जी लेँ
कभी उजले हैँ, कभी काले हैँ
जीवन के रंग निराले हैँ
अम्बर के इस कैनवास पर
पलकोँ के रंग उडेलेँ
आओ चलो इस दिन को जी लेँ

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