शिरीन ....
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे......
ये रिश्ता जिसकी बुनाई में
तेरे मेरे अश्कों के धागे थे
ये रिश्ता जिसकी ख़ुशी में
हम तुम कई रात जागे थे
निभ गया होता तो खुदा हो जाता
उम्र भर की इबादत, दुआ हो जाता
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
संभलते संभलते फिसल ही गए हैं
वक़्त के पाँव मुहब्बत की राह पर
पिघलते पिघलते पिघल ही गए हैं
ख़्वाबों के साहिल हकीकत की बात पर
वादों की बस्ती है एहसास-ऐ-पशेमानी में
तेरा मेरा किस्सा है अब गुजरी कहानी में
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
वो मोड़ जिससे आज तुमने मुझको सदा दी
मैं सदियों तलक उस मोड़ पर ठहरा हुआ था
कभी तुम ना ला सके हद-ऐ-दीद में मुझको
कभी आवाज़ पर मेरी दरारों का पहरा हुआ था
दिल ये कहता है कि मेरा, कोई तेरे सिवा ना था
लोग कहते हैं तू मेरी लकीरों में लिखा ना था
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
यकीनन वक़्त की मजबूरियां नहीं ये
तेरे मेरे निभाने के सलीके की खामियां हैं
जुदा हो रहे हैं हम दूर से अलविदा कहकर
दरमियाँ पसरी जो अपने इस कदर तल्खियाँ हैं
जिस शख्स के संग मन से मन का वास्ता था
उससे जुदा होने का इससे बेहतर भी रास्ता था
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे......
ये रिश्ता जिसकी बुनाई में
तेरे मेरे अश्कों के धागे थे
ये रिश्ता जिसकी ख़ुशी में
हम तुम कई रात जागे थे
निभ गया होता तो खुदा हो जाता
उम्र भर की इबादत, दुआ हो जाता
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
संभलते संभलते फिसल ही गए हैं
वक़्त के पाँव मुहब्बत की राह पर
पिघलते पिघलते पिघल ही गए हैं
ख़्वाबों के साहिल हकीकत की बात पर
वादों की बस्ती है एहसास-ऐ-पशेमानी में
तेरा मेरा किस्सा है अब गुजरी कहानी में
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
वो मोड़ जिससे आज तुमने मुझको सदा दी
मैं सदियों तलक उस मोड़ पर ठहरा हुआ था
कभी तुम ना ला सके हद-ऐ-दीद में मुझको
कभी आवाज़ पर मेरी दरारों का पहरा हुआ था
दिल ये कहता है कि मेरा, कोई तेरे सिवा ना था
लोग कहते हैं तू मेरी लकीरों में लिखा ना था
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......
यकीनन वक़्त की मजबूरियां नहीं ये
तेरे मेरे निभाने के सलीके की खामियां हैं
जुदा हो रहे हैं हम दूर से अलविदा कहकर
दरमियाँ पसरी जो अपने इस कदर तल्खियाँ हैं
जिस शख्स के संग मन से मन का वास्ता था
उससे जुदा होने का इससे बेहतर भी रास्ता था
हमें यूँ ही बिखरना था शायद
इसलिए हम यूँ ही बिखरे.......

kya baaaaaat Ravi ....bahot khoob !...bada sundar dil tak chhoo lene wala bayan kiya tumne....bahut sundar abhivyakti !....
ReplyDeleteथैंक्स दीदी बहुत बहुत आभार
DeleteWaah :)
ReplyDeleteशुक्रिया शेखर जी
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