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Welcome to my blog LAMHE
दिल ने जिस लम्हा जो महसूस किया है मैंने उस अहसास को अल्फ़ाज़ में पिरोने की कोशिश की है|
और ऐसे ही अहसासात और लम्हात का इक गाँव बसाया है जिसे मैंने नाम दिया है "लम्हे"
आपसे उम्मीद है कि मेरी ख़ामियों के लिए आप मुझे मुआफ़ करेंगे.
आपसे एक इल्तजा और कि ये लम्हे मेरा ख़ज़ाना है इन्हें यहाँ से कॉपी करके sms या Email न करें|
लम्हे तक आने के लिए शुक्रिया
रवि





Thursday, April 1, 2010

सच्चाईयाँ

हर कोई झेलता है यहाँ खुद अपनी तन्हाइयां
अंधेरों में छोड़ती  है साथ खुद कि परछाइयां

वादा तो कर गया है वो तूफां में साथ देने का
उसने  देखी नही अभी समंदर कि गहराइयां

हमने जाना ये राज़ महफ़िलों कि रौनकों में
तन्हाइयों से हैं नुकीली महफ़िलीं तनहाईयाँ

चांदनी रातों में  पिघलें आपकी बांहों में हम
रोज़ मरती हैं ऐसे तसव्वुरात कि अंगडाइयां

1 comment:

  1. वादा तो कर गया है वो तूफां में साथ देने का
    उसने देखी नही अभी समंदर कि गहराइयां


    wah........

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