हर कोई झेलता है यहाँ खुद अपनी तन्हाइयां
अंधेरों में छोड़ती है साथ खुद कि परछाइयां
वादा तो कर गया है वो तूफां में साथ देने का
उसने देखी नही अभी समंदर कि गहराइयां
हमने जाना ये राज़ महफ़िलों कि रौनकों में
तन्हाइयों से हैं नुकीली महफ़िलीं तनहाईयाँ
चांदनी रातों में पिघलें आपकी बांहों में हम
रोज़ मरती हैं ऐसे तसव्वुरात कि अंगडाइयां
Thursday, April 1, 2010
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वादा तो कर गया है वो तूफां में साथ देने का
ReplyDeleteउसने देखी नही अभी समंदर कि गहराइयां
wah........